धोनी ने जिस खिलाड़ी का खत्म किया था करियर, उसने बताया, माही की टीम में कैसे जगह हुई थी पक्की

विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल खुद का बदकिस्मत नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि, धोनी ने मिले मौकों का अच्छे से फायदा उठाया।2016 में गुजरात को रणजी ट्रॉफी खिताब दिलाने वाले पार्थिव ने भारत के लिए आखिरी टेस्ट मैच 2018 में खेला था, जबकि आखिरी बार उन्होंने 2012 में देश के लिए एकदिवसीय मैच खेला। 35 वर्षीय पटेल ने फीवर नेटवर्क के साथ बातचीत के दौरान कहा, “मैं धोनी के दौर में खुद को अनलकी नहीं मानता हूं। मैंने उनसे पहले अपना करियर शुरू किया था, और मुझे उनसे पहले प्रदर्शन करने का अवसर मिला।”

मैं अच्छा नहीं खेला इसलिए धोनी टीम में आए

पार्थिव आगे कहते हैं, धोनी टीम में इसलिए आए क्योंकि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था और मुझे निकाल दिया गया। मुझे पता है कि लोग इसे केवल सहानुभूति हासिल करने के लिए कह सकते हैं कि मैं गलत युग में पैदा हुआ था। लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। पटेल ने कहा, “धोनी ने जो कुछ भी हासिल किया है, वह बहुत ही खास है और उन्होंने इसलिए हासिल किया क्योंकि उन्होंने उन अवसरों को दोनों हाथों से लपका। ऐसे में मैं खुद को अनलकी बिल्कुल नहीं मानता।”

जब कंगारु खिलाड़ी ने मुक्का मारने की धमकी दी

इस मौके पर पार्थिव ने कुछ पुरानी यादों को भी ताजा किया। पटेल ने यह भी याद किया कि कैसे “अच्छे दोस्त” मैथ्यू हेडन ने उन्हें चेहरे पर पंच मारने की धमकी दी थी। यह घटना 2004 में एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान हुई थी। पार्थिव कहते हैं, मैं ब्रिस्बेन में ड्रिंक्स ले जा रहा था, यह वह मैच था जिसमें इरफान पठान ने उन्हें आउट किया। उन्होंने पहले ही शतक बनाया था, और यह एक महत्वपूर्ण चरण था जब इरफान ने उन्हें आउट किया। और मैं बस उनके पास से गुजर रहा था और मैंने उन्हें हू हू किया। इसके बाद के वाक्ये को याद करते हुए पार्थिव कहते हैं, वह मुझ पर इतना गुस्सा आया। वह ब्रिस्बेन ड्रेसिंग रूम में खड़ा था। उसने कहा अगर आप फिर से ऐसा करते हैं, तो मैं आपके चेहरे पर मुक्का मारूंगा। मैंने कहा सॉरी। इसके बाद मैं वहां से निकल गया।

बाद में दोस्त बन गए

इस घटना के चार साल बाद दोनों क्रिकेटर चेन्नई सुपर किंग्स में टीम के साथी बने। पटेल ने कहा कि उन्हें आईपीएल के बाद डिनर के लिए ऑस्ट्रेलिया में हेडन के घर पर भी आमंत्रित किया गया था। पटेल कहते हैं, हाँ, हेडन मुझे ब्रिस्बेन में मारना चाहते थे। लेकिन हम उसके बाद अच्छे दोस्त बन गए। हमने सीएसके में एक साथ बहुत क्रिकेट खेली। हमने एक-दूसरे की कंपनी का आनंद लिया।”