इस ‘चमत्कारी सब्जी’ के पत्ते, छाल, फूल, फल, बीज और जड़ है वरदान, दिलाती है रोगों से निजात

सहजन लम्बी फलियों वाली एक सब्जी का पेड़ है, जोकि भारत और दुनिया भर में उगाया जाता है। विज्ञान ने प्रमाणित किया है कि इस पेड़ का हर अंग स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। सहजन को अंग्रेजी में मोरिंगा कहते हैं। ज्यादातर भारतीय सहजन की फली को सब्जी व अन्य भोजन बनाने में करते हैं।

सहजन का पेड़ कही भी आसानी से लग जाता है। इसे बहुत पानी की जरुरत नहीं होती और यह तेजी से बढ़ता है। भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि यह मूलतः उत्तर भारत से ही दुनिया भर में फैला है। भोजन और उपचार के अतिरिक्त सहजन का प्रयोग पानी साफ़ करने और हाथ धुलने के लिए भी किया जा सकता है।

ये है सहजन के लाजवाब फाएदे।।।

सहजन का प्रयोग एनीमिया, गठिया और अन्य जोड़ों के दर्द, अस्थमा, कैंसर, कब्ज, मधुमेह, दस्त, मिर्गी, पेट दर्द, पेट और आंतों में अल्सर, आंतों की ऐंठन, सिरदर्द, दिल की समस्याओं, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की पथरी, थायराइड विकार और बैक्टीरिया, फंगल और वायरल के संक्रमण के उपचार के लिए किया जाता हैं।

सहजन में दूध की तुलना में अधिक कैल्शियम, पालक से अधिक आयरन, संतरे की तुलना में अधिक विटामिन सी, केले से अधिक पोटेशियम और गाजर की तुलना में अधिक विटामिन ए होते हैं।इसमें विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं जो नेत्र रोग, त्वचा में संक्रमण और हृदय रोग के उपचार में मदद करता हैं।

सहजन में मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण गले, छाती और त्वचा के संक्रमण को रोकने में बहुत उपयोगी होता है। सहजन में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं जो हड्डियों और दातों को मजबूत बनाता हैं।

सहजन मिनरल्स जैसे कैल्शियम, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, जस्ता, सेलेनियम और मैग्नीशियम का एक अच्छा स्त्रोत हैं। सहजन के पत्ते, फूल और बीज यौन कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं।

सहजन सूज को कम करने, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और स्तन के दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है। कुछ लोग इसका यूज टॉनिक के रूप में करते हैं। सहजन की ताजा पत्ती का रस नींबू के रस के साथ मिलाकर चेहरे की त्वचा पर लगाने से मुँहासे से छुटकारा मिल सकता हैं।

सहजन विटामिन सी बहुत अच्छा स्त्रोत हैं जो सर्दी और फ्लू के उपचार में मदद करता हैं।