सावन के महीने में करें पार्थिव शिवलिंग की पूजा, कष्टों से मुक्ति के साथ मिलेगा संतान सुख

सावन का पवित्र महीना चल रहा है। सावन के इस महीने को भगवान शिव को समर्पित किया गया है। सावन के इस महीने में भगवान शिव अपने हर भक्त की इच्छा पूरी कर देते हैं। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। सावन के इस महीने में अगर कोई पार्थिव लिंग बनाकर पूजा करता है तो उसे विशेष पुण्य मिलता है। कलयुग में कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने पार्थिव पूजन का प्रारंभ किया था।

शिवपुराण के अनुसार पार्थिव पूजन से धन-धान्य, आरोग्य के साथ ही पुत्र की प्राप्ति होती है। जो दम्पति पुत्र प्राप्ति के लिए कई वर्षों से तड़प रहे हैं, उन्हें पार्थिव लिंग का पूजन अवश्य करना चाहिए। पार्थिव लिंग के पूजन से अकाल मृत्यु का भय भी ख़त्म हो जाता है। शिवजी की आराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं। स्त्री और पुरुष समान रूप से पार्थिव लिंग की पूजा कर सकते हैं। भगवान शिव अपने किसी भी भक्त में अंतर नहीं करते हैं।

बनी रहती है लोक-परलोक में शिव की कृपा:

सभी लोगों को यह बात पता है कि भगवान शिव कल्याणकारी हैं। जो लोग पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसका विधिवत पूजन करते हैं, उन्हें दस हज़ार कल्प तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। सावन के इस महीने में यह और भी लाभकारी माना जाता है। शिवपुराण में यह वर्णित है कि पार्थिव पूजन से जीवन के सबहि दुखों का नाश हो जाता है और सभी मनोकामनाएँ भी पूर्ण हो जाती हैं। अगर हर रोज़ पार्थिव पूजन किया जाए तो इस लोक और परलोक में भी शिव की कृपा बनी रहती है।

नहीं होना चाहिए पार्थिव लिंग 12 अंगुल से ऊँचा:

आपकी जानकारी के लिए बता दें पूजा करने से पहले पार्थिव लिंग बनाना चाहिए। इसके लिए मिट्टी, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग का निर्माण करें। शिवलिंग को बनाते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें की शिवलिंग की ऊँचाई 12 अंगुल से ज़्यादा ऊँचा ना हो। इससे ज़्यादा ऊँचा होने पर पूजा का फल नहीं मिलता है। मनोकामना पूर्ति के लिए पार्थिव शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाएँ। प्रसाद चढ़ाने के बाद यह ध्यान रखें कि जो प्रसाद आपने शिवलिंग से टच करा दिया है, उसे ग्रहण ना करें।

रोगी लोग करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप:

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी पवित्र नदी से ही मिट्टी लेनी चाहिए। इसके बाद मिट्टी में पुष्प, चंदन और दूध डालकर उसे शोधन करें। पार्थिव शिवलिंग बनाने के बाद उसे परमब्रह्म मानकर उसकी पूजा करें। पूरे परिवार के साथ पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पार्थिव लिंग के सामने सभी शिव मंत्रों का जाप किया जा सकता है। जो लोग किसी रोग से पीड़ित हों, उन लोगों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। पार्थिव शिवलिंग के समक्ष दुर्गासप्तशती के मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है। पार्थिव लिंग की विधिवत पूजा करने के बाद श्रीराम कथा सुनाकर उनको पप्रसन्न कर सकते हैं।