धर्म-अध्यात्म

श्राद्ध के दिनों में करे यह 5 काम, आपके सभी दुखों का होगा अंत

श्राद्ध के समय हम अपने मृत बड़े बुजुर्गों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं श्राद्ध का सामान्य अर्थ यह नहीं है कि बड़े बुजुर्ग और पूर्वज हमारे साथ नहीं है बल्कि हम उनको श्राद्ध देते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, अपने मरे हुए पूर्वजों को सालों बाद भी इस तरह से पूजा जाता है धर्म शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि श्राद्ध के दिनों में पूर्वज अगर प्रसन्न होते हैं तो उनके आशीर्वाद से बड़ी सी बड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं इसके साथ ही व्यक्ति को अपनी किस्मत का पूरा साथ मिलता है उसकी किस्मत खुल जाती है, अगर आप भी श्राद्ध के दिनों में अपने पूर्वजों को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो आज हम आपको ऐसे पांच काम बताने वाले हैं जिसको करने से आपके पूर्वज प्रसन्न होंगे और उनका आशीर्वाद आपको मिलेगा।

आइए जानते हैं श्राद्ध के दिनों में पूर्वजों को प्रसन्न कैसे करें

भगवान श्री कृष्ण की करें पूजा

अगर आप श्राद्ध के दिनों में भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा करते हैं तो इससे आपके पूर्वजों के अन्य जन्म भी सुधरने लगते हैं कई बार ऐसा होता है कि पूर्वजों की गलती की वजह से उनका अगला जन्म बड़ा ही कष्टदायक रहता है ऐसी स्थिति में अगर आप भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा करते हैं तो उनका जीवन सुधर जाएगा और उसका बड़ा फल आपको प्राप्त होगा।

गीता के सातवें अध्याय का करें पाठ

आप श्राद्ध के दिनों में घर के अंदर गीता के सातवें अध्याय का पाठ कीजिए, आपके परिवार के किसी ना किसी सदस्य को यह पाठ अवश्य करना चाहिए क्योंकि गीता का यह पाठ पितरों को मुक्ति प्रदान करने वाला बताया गया है यहां तक कि भगवान शिव जी भी गीता के इस अध्याय के महत्व का जिक्र कर चुके हैं अगर आप श्राद्ध के दिनों में यह पाठ करते हैं तो इससे आपके पूर्वज प्रसन्न होंगे और उनका आशीर्वाद आपको मिलेगा।

भूल कर भी किसी का दिल ना दुखाए

आपको इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि श्राद्ध के दिनों में भूल कर भी किसी के दिल को ठेस ना पहुंचाएं क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि किसी न किसी रूप में नारायण मिल जाते हैं और श्राद्ध के इन दिनों में यह निश्चित रूप से होता है आपके पूर्वज कई रूपों में आपकी परीक्षा लेते हैं।

ब्राह्मण के अलावा भी जरूरतमंदों को कराएं भोजन

जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि इंसान के कर्म और दूसरों की सहायता करने से ही हमारे कर्म बनते हैं वैसे हम सभी लोग तो पूरे वर्ष लोगों की सहायता नहीं कर पाते हैं परंतु श्राद्ध के दिनों में अपने पूर्वजों का नाम लेकर जरूरतमंदों की सहायता करने से हमारे पूर्वज प्रसन्न होते हैं इसीलिए तो ऐसा कहा जाता है कि ब्राह्मण को भोजन कराएं परंतु आप एक बार ब्राह्मण की जगह खाली पेट निर्धन व्यक्तियों को भोजन करा कर अवश्य देखिए आपको स्वयं इस बात का अनुभव हो जाएगा कि पूर्वजों की असली खुशी कहां पर है खासतौर से निर्धन बच्चों को भोजन कराने से हमारे पूर्वज अति प्रसन्न हो जाते हैं क्योंकि बच्चों में भगवान का वास होता है।

रोजाना सुबह शाम जलाएं दीपक

आजकल के समय में नई पीढ़ी श्राद्ध के बारे में कुछ नहीं जानती है आज हम श्राद्ध को सही तरीके से नहीं मानते हैं वास्तव में श्राद्ध कोई खुशी का त्यौहार नहीं होता है बल्कि यह दिन ईश्वर की याद के दिन होते हैं इसलिए आप अपने घर के मंदिर में भगवान के समक्ष घी का दीपक जरूर जलाएं।

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