पाताल में धंसता ही जा रहा है इस मंदिर का शिवलिंग, वजह जानकर हो सकते हैं हैरान!

दुनिया भर में भारत देश की पहचना देवी-देवताओं वाले देश के तौर पर की जाती है, जहां अलग-अलग धर्म के अपने-अपने भगवान हैं और उनके कई सारे मंदिर भी हैं, जहां भगवान के भक्त उनके दर्शन को पहुंचते हैं। उन्हीं धर्मों में एक हिंदू धर्म है, जिसके अनुयायियों की संख्या भारत में सबसे अधिक है, लिहाज हिंदू धर्म धर्म से जुड़े मंदिरों की संख्या भी काफी अधिक है।

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हिंदू धर्म में एक खास भगवान शिव जी, जिन्हें भोलेनाथ, शिव शंकर के साथ अन्य कई तरह के नामों से जाना जाता है। भारत में शिव जी के कई सारे मंदिर है, जहां खास तौर पर शिवलिंग की पूजा की जाती है। ऐसे में आज आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसको लेकर लोगों का मानना है कि यहां शिवलिंग पताल में घुंसी है।

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बताया जाता है कि शिव जी का यह मंदिर हिमालय की गोद में बसे एक ऐतिहासिक गांव में स्थित है। इस मंदिर को लेकर लोगों की मान्यता है कि मंदिर का शिव लिंग धरती पर बढ़ रहे पापियों के पाप के कारण ऐसा है, ऐसे में जिस दिन पापियों के पाप हद से ज्यादा हो जाएंगे ये शिव लिंग पूरी तरह से पाताल में समा जाएगा। बता दें कि यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा घाटी की गोद में बसे हेरिटेज गांव परागपुर से लगभग आठ किलोमीटर दूर है।

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जानकारी के अनुसारा इस मंदिर को भगवान शिव का अति प्राचीन मंदिर माना जाता है, जिसे श्री महाकालेश्वर जी के नाम से जानते हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर में पाताल लोक के लिए एक गुप्त रास्ता है। जिसकों लेकर लोगों की मान्यता है कि इसी रास्ते से ऋषिमुनि पाताल से होकर कैलाश पर्वत तक जाते थे, जहां वे शिवजी की तपस्या करते थे।

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बताया जाता है कि मंदिर का एक बड़ा हिस्सा प्राचीन गुंबदों और आकर्षक मंदिर श्रृंखला में है, जो अति शोभनिय है। इसके साथ ही आपको बता दे कि व्यास नदी के सौम्य जल प्रवाह भी इस मंदिर को छूते हैं। जानकारों के अनुसार इस मंदिर का संबंध हिन्दू धर्म के दोनों महाकाव्यों (महाभारत और रामायण) के साथ भी जोड़ा जाता है।