धर्म-अध्यात्म

पार्वती के इस कीमती रत्न के लिए, यहां महाकाल ने खोला था तीसरा नेत्र…

हमारे देश ‘भारत’ की पहचान दुनिया के ऐसे देशों के तर्ज पर की जाती है, जहां कई धर्मों के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं।

हमारे देश ‘भारत’ की पहचान दुनिया के ऐसे देशों के तर्ज पर की जाती है, जहां कई धर्मों के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। भारत देश में मुख्यत: (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) धर्म लोग रहते हैं, और यहां सभी धर्म के लोगों के अपने-अपने भगवान, अल्लाह, गुरु, ईश्वर हैं।

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ऐसे में भारत के लगभग सभी शहरों में हर धर्म के अगल-अलग प्रसिद्ध धार्मिक स्थल स्थित हैं। जिन्में कुछ स्थल ऐतिहासित स्थलों के श्रेणी में आते हैं। ऐसी ही एक जग जाहीर जगह है जिसके साथ लोगों की मान्यता है कि यहां भगवान भोलेनाथ ने अपना तीसरा नेत्र खोला था।

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हिंदू धर्म के सबसे बड़े और ‘ताकतवर भगवानों’ में से एक शिव शंकर को महाकाल भी कहते हैं। पुराणों में निलकंठ से जुड़े कई तरह के किस्से शामिल हैं। जिनमें से एक इस खास जगह को लेकर भी मशहूर किस्सा है। इस जगह पर डमरूधारी ने अपना तीसरा नेत्र खोला था।

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आपको बता दें कि यह जगह हिमाचल प्रदेश स्थित मणिकर्ण नाम से मशहूर है। शायद ही आज के युवाओं को इस बात की जानकारी होगी? इससे पहले ये जानिए कि यहां हिन्दू और सिख श्रद्धालु काफी दूर-दूर से आते हैं और श्रद्धा भाव का अर्पण करने हैं।

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दरअसल, हाल के दिनों में यहां पार्वती नदी के एक तरफ महादेव का मंदिर बना है। इस जगह को लेकर ऐसा कहा जाता है कि यहां शिव जी, पार्वती के साथ जल क्रीडा कर रहे थे। इसी बीच पार्वती के कान में जड़े आभूषण से एक मणि पानी में गिर गई। पानी के तेज बहाव के साथ मणि बहती हुई जल्द ही पाताल लोक तक पहुंच गई।

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जिसके बाद इसकी खबर त्रिनेत्र के पास पहुंची, और उन्होंने अपने गणों को मणि लाने के लिए पाताल लोक भेज दिया, लेकिन शिव के गण मणि लाने में असफल रहे। जिससे नाराज महाकाल ने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया और तभी नैना देवी का जन्म हुआ।

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बता दें कि इस जगह को नैना देवी के जन्मस्थली के रूप में भी ख्याति प्राप्त है।नैना देवी ने अपने जन्म के साथ ही पाताल लोक पहुंच कर शेष नाग से मणि की मांग की, जिसके बाद शेषनाग ने स्वयं ही मणि वापस कर दिया।

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