सात साल बाद मकर संक्रांति पर बन रहा है ऐसा योग, इस चीज का करेंगे दान तो सभी कष्टों से मिलेगा छुटकारा

ये तो हम सभी जानते हैं कि हिंदु धर्म में कई सारे त्योहार आते हैं जिनमें से कुछ त्योहार बेहद ही ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। हर बार मकर संक्रांति त्योहार साल 14 जनवरी को आती है लेकिन इस बार 2020 में यह 15 जनवरी को पड़ रहा है।

मकर संक्रांति त्योहार तिथि और शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति तिथि- 15 जनवरी 2020
संक्रांति काल – 07:09 बजे ( 15 जनवरी 2020 )
पुण्यकाल – 07:09 बजे से लेकर 12:31 बजे तक
महापुण्य काल – 07: 09 बजे से लेकर 09:03 बजे तक
संक्रांति स्नान काल – प्रात: काल, 15 जनवरी 2020

वहीं शास्त्रों की मानें तो मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। यही वजह है कि इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। राशि बदलने के साथ ही मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। वहीं, मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास की समाप्ति और शुभ कार्यो की शुरुआत हो जाती है।

इसके साथ ही कहते हैं कि इस दिन स्नान-दान, तिल ग्रहण करने व कंबल दान करना शुभ माना जाता है और सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। मकर संक्रांति को खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने खास होता है। इसी वजह से इसे कई जगहों पर खिचड़ी भी कहा जाता है। मान्यता है कि चावल को चंद्रमा का प्रतीक मानते हैं, काली उड़द की दाल को शनि का और हरी सब्जियां बुध का प्रतीक होती हैं।

बताते चलें की शास्त्रों में इस दिन किया हुआ दान अक्षय फलदायी होता है। वहीं बता दें कि प्रातःकाल स्नान करके, सूर्य को जल दें, फिर पूजा उपासना करें। इसके बाद अन्न का, घी का, और वस्त्र का दान करें। चावल, दाल, सब्जी, नमक और घी यानि खिचड़ी का दान सर्वोत्तम होता है। इसके अलावा ये भी बता दें कि इस दिन शनि देव के लिए प्रकाश का दान करना भी बहुत शुभ होता है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है।

हमारे यहां काफी पौराणिक मान्यता है कि इस दिन तिल से बनी सामग्री का दान किया जाता है, वहीं ज्योतिषियों की माने तो इस दिन तिल से बने सामान को दान करने के साथ ही जो भी व्यक्ति इसे ग्रहण करता है उसपर से सभी से कष्ट दायक ग्रहों से छुटकारा मिलता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं।

एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है। एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति होती है। हालांकि कुल 12 सूर्य संक्रांति हैं, लेकिन इनमें से मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति प्रमुख हैं।