सुबह उठकर करें इन 7 नामों का जाप, हर परेशानी से मिलेगी मुक्ति!

जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करनी होती है, ये बात शायद हर किसी को पता है, लेकिन इसके बाद भी सफल लोगों की संख्या काफी कम है, यानी सिर्फ मेहनत से ही सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। आप अपने आस-पास ही देखिए, कई ऐसे लोग दिखेंगे जो अपनी जीवन को सफल बनाने और धन कमाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद वे उतने सफल नहीं है जितना की वह चाहते हैं।

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मेहनत के बाद भी अगर आपको सफलता नहीं मिल रही है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। उन्हीं में कुछ हैं कुंडली दोष और जाने-अनजाने में किये गए बुरे कर्म जो आपकी सफलता के आड़े आ रही है। आपके बुरे कर्मों के कारण आपके उपर भगवान की दया-दृष्टि नहीं पड़ रही है, जो आपके सफता के बीच बड़ी बाधा बन रहा है। ऐसे में आज आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिससे आप इन बुराइयों को पार करते हुए अपनी सफलता की ओर बड़ सकते हैं।

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दरअसल, महाभारत और गरुड़ पुराण को आधार बनाकर जानकार बताते हैं कि अगर सुबह उठने के साथ ही इन सात ऋषि मुनियों के नाम का जप किया जाए तो आपके दोष कट सकते हैं और तब आपके सफलता के बीच कोई बाधा नहीं आ सकती है। ऐसा करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

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आईए आपको इन ऋषि मुनियों के नाम और इनके बारे में कुछ खास बातें बताते हैं। इन सात ऋषि मुनियों मे पहना नाम है परम पूज्य…

ऋषि विश्वामित्र:  आपको बता दें कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और इनके भ्राता लक्ष्मण के गुरु ऋषि विश्वामित्र ही थे, जिन्होंने गायत्री मंत्र की रचना की थी। इनके नाम का जाप करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो सकती है।

ऋषि वशिष्ठ: ब्रह्मा जी की इच्छा शक्ति से जन्में ऋषि मुनि वशिष्ठ अत्यंत प्रभावशाली राजा दशरथ के चारों पुत्र, राम, लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न के गुरु ऋषि मुनि वशिष्ठ ही थे।

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ऋषि द्रोणाचार्य: महाभारत में पराक्रमी पांडवों और कौरवों को शिक्षा देने वाले गुरु का नाम ऋषि द्रोणाचार्य ही था। हालांकि महाभारत के युद्द में इन्होंने अधर्म का साथ दिया था, लेकिन इसकी ज्ञान क्षमता पर किसी को संदेह नहीं हो सकता।

ऋषि अगस्त्य: सप्त ऋषियों के क्रम में ऋषि अगस्त्य का भी एक अहम स्थान माना जाता है। जिनका जन्म काशी में हुआ था, इनकी एक एक बेटी थीं लोपामुद्रा।

ऋषि भृगु:  इन्होंने भृगु संहिता की रचना की थी, जिसके लिए इन्हें खास तौर पर जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ऋषि भृगु का जन्म भगवान ब्रह्मा के मष्तिष्क से हुआ था।

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ऋषि कश्यप: ऐसी मान्यता है कि कश्यप गोत्र की उत्पत्ति ऋषि कश्यप के नाम से ही हुई है। वहीं ऋषि कश्यप को लेकर बताया जाता है कि इनकी कुल 12 पत्नियां थीं।

ऋषि अत्रि: माता अनसूया के पति से ऋषि अत्रि, आपको यह भी बता दें कि जब माता सीता और भगवान राम को वनवास हुआ था तब वे दोनों कुछ देर के लिए ऋषि अत्रि के आश्रम में भी ठहरे थे।