राजनीति

इस दलित BJP सांसद ने कहां- ‘सांसद रहूं या न रहूं, संविधान के साथ नहीं होने दूंगी छेड़छाड़’

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने आरक्षण को लेकर हमला बोला है।

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने आरक्षण को लेकर हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के बहराइच से दलित सांसद सावित्री बाई ने कहा कि मैं सांसद रहूं या ना रहूं, लेकिन संविधान के साथ छेड़छाड़ नहीं होने दुंगी। साथ ही केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले दिनों से जिस तरह से बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्तियों को तोड़ने के मामले सामने आए हैं, दलितों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है वह चिंता का विषय है।

savitribai phule
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लखनऊ में आयोजित रैली के दौरान सावित्री ने जमकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ हमला बोला। अपने बगावती सुरों के परिणाम की चिंता ना करते हुए सावित्र ने कहा कि मैं किसी भी स्थिति से नहीं डरती हूं, मैं पूरी कोशिश करूंगी को हमारे समुदाय के लोगों को संविधान के अनुसार आरक्षण मिले। सावित्री ने कहा कि कभी कहा जा रहा है कि हम संविधान की समीक्षा करेंगे, आरक्षण खत्म कर देंगे, इनकी इतनी हिम्मत। मैं सांसद रहूं या ना रहूं, लेकिन संविधान के साथ छेड़छाड़ नहीं होने दुंगी। आरक्षण को लागू करवाकर रहेंगे।

लखनऊ में आरक्षण बचाओ महारैली के दौरान सावित्री फुले को लोगों ने अपना जबरदस्त समर्थन दिया और दीदी तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं का नारा लगाया। फुले ने कहा कि बहुजन समाज को आरक्षण दिलाने का लक्ष्य तैयार किया है, उसको मैं पूरा कराकर रहुंगी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमला बोलते हुए फुले ने कहा कि हमारे समाज के लोग आज दर-दर की ठोकर क्यों खा रहे हैं, आज हमें सम्मान क्यों नहीं मिल रहा है। हाल ही में दलितों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी बहू बेटियों पे पेट्रोल डालके फूंकने का काम किया है, पांव छू जाने के कारण पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है, हमारा भाई अगर घोड़े पर सवार होकर अगर जा रहा है तो उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है।

केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए फुले ने कहा कि बाबा साहब ने देश को संविधान दिया, ऐसे में बाबा साहब का अपमान संविधान का अपमान है। जो लोग बाबा साहेब की मूर्ति तोड़ते हैं वह गद्दार हैं, ऐसे में उनके खिलाफ इसी के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने गौतम बुद्ध के बताए रास्ते पर चलने के लिए 17 साल पहले अपना घर छोड़ दिया था। वह आगे भी दलितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगी, अगर उन्हें अंत में एक इंच जमीन भी दफनाने के लिए नहीं मिलती है तो इसकी मुझे परवाह नहीं है।

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