छठ पूजा में भूल कर भी न करें ये गलतियां, रखें बेहद सावधानी।

दोस्तों आप सभी को छठ पूजा की ढेरों शुभकामनाएं. सूर्य की उपासना का पर्व है छठ। आजकल तो सब लोग इसे बहुत ही धूमधाम से मनाने लगे हैं .कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला यह त्योहार बहुत ही खूबसूरत है .सूर्य की उपासना का यह पर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है .

दोस्तों बहुत ही श्रद्धा के साथ इसके कड़े कड़े नियम भी तय किए गए हैं .इस पर्व में पूजा और व्रत से जुड़ी बहुत ही कड़ी मान्यताएं होती हैं।  छठ पर्व में सूर्य की उपासना की जाती है। इसलिए यदि आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति खराब है तो उस स्थिति में भी इस व्रत को रखने से लाभ मिलता है .दोस्तों इस व्रत को करने के लिए जितनी मान्यताएं हैं उतनी ही इस व्रत को रखने में सावधानियां बरतनी चाहिए। आज मैं आपसे उन्हीं के बारे में  बात करने वाली हूं तो शुरू करते हैं इस वीडियो को ,दोस्तों ध्यान से सुनिए, पूरा सुनिए ताकि कोई गलती न हो।

मान्यता के अनुसार भले ही घर के सब लोग छठ का व्रत ना कर रहे हों, कोई एक व्यक्ति ही छठ का व्रत कर रहा हो. लेकिन पूरे परिवार को तामसिक भोजन से बचना चाहिए और छठ के नियमों का पालन करना चाहिए। पूरे परिवार को स्वच्छता और सात्विकता का पालन करना चाहिए. छठ पर्व पर साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बिना नहाए किसी भी पूजा सामग्री को नहीं छूना चाहिए।

. इस पूजा में बांस की टोकरी का विशेष महत्व होता है। इस टोकरी में पूजा का सामान अर्घ्य स्थल पर लेकर जाते हैं और भेंट करते हैं इसका इंतजाम आपको जरूर करना चाहिए. दोस्तों खरना के लिए जो भी प्रसाद बनाया जाता है उसमें भूल से भी मूंग की दाल या मसूर की दाल का प्रयोग ना करें। बस चने की दाल का ही प्रयोग करना चाहिए.छठ पूजा के दौरान जब प्रसाद बनाते हैं तो उस जगह पर  खाना या मुंह में पानी नहीं डालना चाहिए, ना ही बच्चों को देना चाहिए। अगर देना है तो उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाकर खिलाएं .और ध्यान रहे दोस्तों प्रसाद बनाते समय अग्निपूजा जरूर कर लें। बिना अग्निपूजा के प्रसाद अधूरा माना जाता है.

घर के हर सदस्य को शराब पीना, सिगरेट पीना, इन सब से कोसों दूर रहना चाहिए.छठ पूजा पर जो डाला है जिसमें हम प्रसाद सजाकर घाट पर लेकर जाते हैं उसे अच्छे से धो लेना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि आपको उसमें सीताफल का भोग नहीं लगाना है दोस्तों सिर्फ तन को ही नहीं मन को भी शुद्ध रखें. इस दौरान ना किसी की निंदा करें, ना किसी से लड़ाई करें, ना किसी की चुगली करें और ना किसी को बुरी नजर से देखें.,कहते हैं ऐसा करने से छठ का फल आपको पूरा नहीं मिलता. इस प्रकार छठ माई की व्रत को बिना गलतियों के पूरे परिवार के साथ पूरी श्रद्धा के साथ हमें पूर्ण करना चाहिए. आज के लिए बस इतना ही। दोस्तों मैंने कोशिश की है कि सारी सावधानियों को कवर कर पाऊं ,लेकिन अगर फिर भी कुछ रह गया हो तो उसके लिए मुझे क्षमा कीजिए। टेक केयर, जय माता दी, जय छठ माई.