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महिलाओं को नागा साधू बनने के लिए खुद करवाने पड़ते हैं ये काम, जानकर हिल जायेंगे आप

भारत एक ऐसा देश है जहाँ कई धर्मों के लोग निवास करते हैं मगर सबसे ज्यादा यहाँ हिन्दू धर्म को मान्यता दी जाती है और लोग उनके नियमों का पालन करते हैं. हमारे देश के लोग हर धर्म का सम्मान करते हैं.मगर आज हम आपको हिन्दू धर्म से जुड़े नागा साधुओं के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं जिससे आप भी अब तक अनजान होंगे. जी हाँ महिला नागा साधू बनने के लिए एक महिला को क्या क्या करना पड़ता है.

आइये बताते हैं आपको…

हमारे देश भारत हमेशा से आस्था का केंद्र है,आज हम आपको मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बारे में आपको बताने जा रहे है जो भारत देश के आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है! यहाँ पर बहुत ही प्राचीन मंदिर,है और यह पुरातत्व विभाग की बहुमूल्य धरोहर माना जाता है! आपको बता दे कि यहाँ की संस्कृति पूरे देश में मानी जाती है! यंही पर नागा साधू बनने की प्रक्रिया भी पूर्ण होती है!आपको बता दे यहाँ केवल पुरुष नागा साधू ही नहीं बल्कि महिला नागा साधू भी बनते है! बहुत लोगो को नहीं पता होगा कि यहाँ महिला नागा साधू भी बनते है!

कुभ के मेले में महिला नागा साधू भी शामिल होने जा रही है! इनकी भी अपनी रहस्य मई दुनिया होती है,जिस बारे में कभी सोंच भी नहीं सकते है! यह महला नागा साधू बनने के लिए बहुत तप करना पड़ता है! इनका जीवन भी पुरुष नागा साधू की तरह ही होता है! किसी भी महिला नागा साधू बनने के लिए 10 साल तक ब्रम्हचर्या का पालन करना पड़ता है! अगर वह ऐसा नहीं कर पाती है तो वह महिला नागा साधू नहीं बन पाती है! और इस बात का निर्णय महिला नागा साधू की गुरु करती है!

महिला नागा साधू बनने के लिए मुंडन किया जाता है,और उसे यह साबित करना होता है कि वह पूरी तरह परिवार से दूर हो चुकी है! और उसे अब किसी भी बात का मोह नहीं है! कुम्भ में नागा साधुओ के साथ महिला संयासन भी शाही स्नान करती है नागा संयासन को अखाड़े के सभी साधू माता कहते है और उसका सम्मान भी करते है! महिला को महिला नागा साधू बनने के बाद पुरुष नागा साधू के समान नहीं रहना पड़ता है! दोनों के बीच कपडे का फर्क होता है!महिला नागा संयासने नग्न स्नान नहीं करती है! उन्हें कपडे पहनने की छूट रहती है! महिला नागा संयासन को सन्यास लेने से पहले स्वयं का पिंडदान और तर्पण करना होता है! यानी वह खुद को मृत मान लेती है!

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