दलितों का प्रदर्शन नहीं आतंक!  पूरे देश में मचा कोहराम, सच जान हिल जाएंगे आप…

शांति प्रिय देश से शांति तो कब का गायब हो चुकी है, वहीं अगल-अलग जाति-धर्म के लोग भारत में एक ही छत के नीचे सद्भाव और भाईचारे के साथ रहते हैं। लेकिन हाल के दिनों में ऐसी बाते महज एक ढोंग के सिवाय कुछ भी नहीं है! हाल के दिनों में लोकतंत्र के लिए मशहूर भारत देश में कोर्ट के फैसले के खिलाफ हिंसा और हर छोटी-मोटी बात पर प्रदर्शन और फिर सरकारी, निजी संपत्तियों में आग लगा देने जैसी गंभीर घटनाएं भी आम बात हो चुकी है?

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इस रिपोर्ट में दिख रही तस्वीरों को गौर से देखिए, जो दिख रहा है उसे जानकर विचलित हो सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अब भारत में न तो कोई दलित रहा और न ही कोई सवर्ण बचा है, आज जिस तरह से देश के हाल हो चले हैं या ऐसा कर दिया गया है, उससे ऐसा दिखता जैसे अब यहां सिर्फ ‘गुंडों की फौज’ ही बचा है, जो कोर्ट के फैसले के खिलाफ कानून को दाक पर रख सड़कों पर उपद्रव मचा रहे हैं। यहां हैरानी की बात तो यह है कि जिस प्रदर्शन की तस्वीरें देख रहे हैं, वो दलित अपने हक के लिए कर रहे हैं।

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यहां आपको दलितों के उस हक के बारे में भी बताएंगे, लेकिन इससे पहले दलितों के इस प्रदर्शन का सच जानिए? जिसमें ये लोग (बंदूक, भाला, गड़ासा, लाठी) कई तरह के पौराणिक और आधुनिक हथियारों से लैस हो कर भारत बंद कराने चले हैं! शायद दलितों की बुद्धी भ्रष्ट हो चुकी है, इसलिए वे इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिरी तोड़-फोड़ और आगजनी से वे अपने किसा आग को ठंडा करने का प्रयास कर रहे हैं।

दलितों के प्रदर्शन का सच

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दरअसल, जिन्हें आप शोषित और पिछड़ा समाज का मान रहे हैं, उन मासूम से दिखने वाले कथित दलितों ने का असली चेहरा यही है! इन तस्वीरों को देख कर आप भी अंदाजा लगा सकते हैं कि एक गांधी जी थे, जिन्होंने एक लाठी के सहारे सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अंग्रेजों के चंगुल से ‘पूरे भारत’ को आजाद कराया था, जबकि ये जो अपने आप को दलित, पिछड़ा और शोषित वर्ग का मानते हैं, वे गांधी जा के उसी भारत की सबसे बड़ी अदालत के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर कर भारत बंद करने के लिए हाथों में बंदूक थाम चुके हैं। न सिर्फ बंदूक लेकर निकले बल्कि गोलियां भी चलाते दिखे।

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ये तस्वीरें मध्यप्रदेश की है जहां से अब तक तीन लोगों के मारे जाने की खबर आ चुकी है, जबकि अन्य कई लोग गंभीर रूप से घायल भी बताए जा रहे हैं। आपको बता दें कि भारत बंद को लेकर जारी दलितों का आतंक लगातार देश पर हावी हो रहा है। सोमवार को दलितों द्वारा बुलाया गया भारत बंद अब हिंसा और गुंडागर्दी में बदल गया है।

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देशभर में दलितों ने आतंक फैला रखा है। खुले हथियारों से फायरिंग और प्रदर्शन कर आम लोगों, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बक्शा जा रहा हैं। वहीँ मध्य प्रदेश के ग्वालियर में दिल दहला देने वाली तस्वीर देखने को मिली। यहाँ आप देखते हैं कि भारत बंद का नारा लगाते कुछ दलित समर्थक हाथ में लाठी डंडे और पिस्तौल लेकर घूम रहे हैं।

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राज्य में भारत बंद के नाम पर दलितों द्वारा फैलाए गये आतंक में अभी तक तीन लोगों की मौत हो गयी है। प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प में मध्यप्रदेश के मुरैना में फायरिंग में व्यक्ति की मौत हो गई है। वहीँ राज्य के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जबकि दूसरी ओर ग्वालियर में प्रदर्शन कर रहे दो समूहों में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत होने की खबर है। इसके साथ ही देश के अन्य हिस्सों से भी दलितों के आतंक की खबरें आ रही है। वहीं कुछ अप्रिय घटनाएं राजस्थान से भी आ रही है।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में उतरे दलित समुदाय के गुंडों ने जगह जगह हिन्दू देवी देवताओं के मन्दिरों में भी तोड़ फोड़ की है!  हालत पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है और जैसे-जैसे भारत बंद के नाम पर शहरों को फूंका जा रहा है वैसे-वैसे अब यह लड़ाई दलित बनाम सवर्ण भी होती जा रही है।

ऐसे में कई जगहों पर दलितों के भारत बंद के विरोध में सवर्ण समुदाय के लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जिससे हालात नाजुक होते जा रहे हैं। हालांकि पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये बल प्रयोग भी कर रही है। लेकिन हालात को देख ऐसा लगता है जैसे इस प्रदर्शन को रोकने के लिए अभी और बलिदान देने पड़ेंगे! बता दें कि प्रदर्शन के दौरान मरने वालों की संख्या अब पांच हो चुकी है।

इस लिए हो रहा है हिंसक प्रदर्शन

आपको बता दें कि सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च जारी किए गए एक आदेश में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि इस एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी या आपराधिक मामला दर्ज नहीं किए जाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज किए गए मामले में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी थी। कोर्ट का साफ मानान है कि इन मामलों में भी जांच के बाद केस दर्ज किए जाएं, क्योंकि इस एक्ट के तहत दुरुपयोग के भी कई मामले आ चुके हैं।