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ठंड का कहर है जारी,दिल और सांस के मरीज रहें सावधान और रखें इन बातों का विशेष का ध्यान……

ठंड का कहर है जारी.........

सांकेतिक तस्वीर

बता दें,के ठंड बढ़ने से दिल और रक्तचाप की समस्या बढ़ने लगी है जिससे सांस के मरीज भी परेशान हैं और चिकित्सकों के पास दिल और फेफड़ों के रोगियों की संख्या बढ़ गई है तो ऐसे में ठंड से लड़ने के लिए अपने दिल और फेफड़ों को तैयार कर लें, सावधानी बरतें, ताकि सर्दी में परेशानी न हो।

वहीं,इस मौसम में फेफड़ों की परेशानी तो दिक्कत करती ही है, दिल के मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है और आलस्य की वजह से लोग अपने शरीर खासतौर पर अपने दिल को तंदुरुस्त रखने पर ध्यान नहीं देते हैं, जबकि सर्दियों में सबसे ज्यादा खतरा दिल को ही रहता है।

लेकिन ठंडे मौसम में दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिल में रक्त और ऑक्सीजन का संचार कम होने लगता है। इससे हाइपरटेंशन और दिल के रोगों वाले मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और ठंडे मौसम में ब्लड प्लेटलेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है।

सर्दियों में सीने का दर्द और दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। धूप हल्की और कम निकलने के कारण शरीर में विटामिन डी की कमी भी हो जाती है। ऐसे में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठंड ने अस्थमा के मरीजों की परेशानी भी बढ़ा दी है। मरीजों की सांसें फूलने लगी हैं। अल सुबह और रात में नमी रहने के कारण ऐसे मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।

नियमित व्यायाम करें-

इस मौसम में नियमित व्यायाम और संतुलित व पौष्टिक भोजन लेना चाहिए, जो ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम कर देते हैं। – डॉ. राजीव अग्रवाल, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ

जीवन शैली बदलें-

मौसम के हिसाब से जीवन शैली में बदलाव लाना चाहिए। ठंडे मौसम में कम थकान वाला व्यायाम करना चाहिए। सुबह जल्दी और देर रात तक बाहर रहने से परहेज करना चाहिए। – डॉ. ममतेश, हृदय रोग विशेषज्ञ

चिकित्सक के संपर्क में रहें-

अस्थमा के मरीज अपने चिकित्सक के संपर्क में रहें। अपने इनहेलर का इस्तेमाल करें। ठंड से बचने की कोशिश करें और – डॉ. वीरोत्तम तोमर, सांस और छाती रोग विशेषज्ञ।

एसे बरतें सावधानी-

गरिष्ठ भोजन से दूरी बनाएं।

खाते ही न सो जाएं।

सकारात्मक सोच रखें और तनाव से दूर रहें।

धूप निकलने के बाद भी ठंडे पानी से न नहाएं, पानी गुनगुना रखें।

रात में ठंडे पानी के इस्तेमाल से बचें।

हाथ मुंह धोने के लिए भी गुनगुना पानी इस्तेमाल करें।

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