त्योहार

महाशिवरात्रि कब है? जानिए क्या है भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

महाशिवरात्रि भगवान शिव से जुड़े सबसे बड़े व्रत में से एक है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। वैसे, एक शिवरात्रि जिसे हम मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं वह हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को होता है। उत्तर भारतीय कैलेंडर के मुताबिक फाल्गुन महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि सबसे ज्यादा विशेष है। इसे ही महाशिवरात्रि कहते हैं।

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महाशिवरात्रि इस बार 21 फरवरी (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार चतुर्दशी की शुरुआत 21 तारीख को शाम 5.20 बजे के बाद से हो रही है। इस लिहाज से शाम के बाद पूजा करना शुभ होगा।

महाशिवरात्रि पर शाम और रात की पूजा का विशेष महत्व होता है। सूर्य इस दिन सतभिषा नक्षत्र में होंगे। चतुर्दशी तिथि का समापन 22 फरवरी को शाम 7.02 मिनट पर होगा।

महाशिवरात्रि पर निषित काल पूजा का मुहूर्त 21 फरवरी को आधी रात में 12.27 बजे (यानी 22 फरवरी) से शुरू होगा और 1.17 बजे तक रहेगा। ये करीब 49 मिनट का मुहूर्त होगा। वहीं शिवरात्रि पारण का समय 22 फरवरी की सुबह 7.03 बजे से दोपहर बाद 3.47 तक रहने वाला है। महाशिवरात्रि पर रात के पहर के अनुसार भी पूजा के शुभ मुहूर्त हैं।

रात्रि पहला पहर, पूजा का समय- 06.41 PM से 09.46 PM
रात्रि दूसरा पहर, पूजा का समय- 09.46 PM से 12.52 AM (22 फरवरी)
रात्रि तीसरा पहर, पूजा का समय- 12.52 AM से 03.58 AM (22 फरवरी)
रात्रि चौथा पहर, पूजा का समय- 03.58 AM से 07.03 AM (22 फरवरी)

शिवरात्रि के व्रत से एक दिन पहले त्रयोदशी तिथि पर श्रद्धालुओं को एक बार भोजन करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन साधकों को सुबह के नियमित पूजा पाठ के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन उपवास रखें। मंदिर जाकर भी भगवान शिव की विशेष पूजा की जा सकती है।

भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र, उजले या पीले फूल, धतुरा, मिठाई और गाय के दूध का इस्तेमाल जरूर करें। महाशिवरात्रि पर शाम या रात की पूजा का महत्व विशेष है। शिवरात्रि की पूजा पूरे रात में एक बार या फिर चार बार की जा सकती है। पूरे रात को चार पहर में बांटा गया है और इसलिए सभी पहर के अलग-अलग पूजा के मुहूर्त भी हैं।

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